नवरात्र में बनारस बन जाता है मिनी बंगाल
पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा दुनिया भर में मशहूर है इसमें शक नहीं है
लेकिन वाराणसी में भी दुर्गापूजा की रौनक पश्चिम बंगाल से जरा भी कम नहीं होती । बड़े-बड़े
लाउडस्पीकर
में बजते नवरात्र के गाने किसी दूसरे के
लिए शोर हो सकते हैं लेकिन वे बनारस के लिए रस धार की तरह होते हैं । नवरात्र पर बनारस
की सड़कों और गलियों में लगी झालर और बत्तियां बत्तियां ऐसी लगती हैं मानों सूरज
अलग-अलग रंगों में आंख मिचौली खेल रहे हों । बनारस में 1000 से ज्यादा छोटे-बड़े पंडाल
और दुर्गा मूर्तियां प्रतिस्थापित की जाती हैं। इनमें से कई पंडाल और दुर्गा
प्रतिमाएं बेहद ही आकर्षक और खूबसूरत होती हैं ।
सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति, टाउन हॉल
बनारस के प्राचीन दुर्गा पूजा में से एक है सार्वजनिक दुर्गोत्सव
समिति की दुर्गा पूजा । टाउन हॉल के हॉल में लगने वाली इस दुर्गा पूजा की कई खासियत
है । नवरात्र के पहले ही दिन मूर्ति की स्थापना की जाती है । पूरे दुर्गा पूजा के
दौरान टाउन हॉल का हॉल किसी मंदिर की तरह बन जाता है, जहां लोग चप्पल उतारकर दर्शन
करने जाते हैं । इस दुर्गा पूजा की सबसे बड़ी पहचान थी यहां लगने वाली मूर्तियों
की सुंदरता, वैसे तो हर दुर्गा जी की मूर्ति सुंदर होती है लेकिन यहां की मूर्ति
का मुकाबला कहीं से नहीं किया जा सकता । मन करता था कि नौ दिन तक टाउन हॉल में ही
रहूं और दुर्गा जी के सामने रहूं । टाउन हॉल की मूर्ति बनाते हैं विश्वनाथ मूर्ति
कला केंद्र । फिलहाल 2015 के विवाद से टाउन हॉल ने बड़ी और मिट्टी की मूर्ति लगाने
की परंपरा बंद कर दी । मुझे इसका झटका लगा । सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति की एक और
खासियत है नौ दिनों तक चलने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम । साल 2004 तक सुबह और रात
को श्रीकृष्णलीला का मंचन होता था लेकिन अब 9 दिनों तक भजन गायक अपनी प्रस्तुति
देते हैं । इसके साथ टाउन हॉल के मैदान में मेला भी लगता है ।
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| सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति की ओर से लगाई गई मां की प्रतिमा |
प्रीमियर ब्वॉयज क्लब, हथुआ मार्केट
बनारस का ये सबसे बड़ा दुर्गा पूजा क्लब है । इस क्लब की पहचान है
इसका भव्य पंडाल सेट । साल दर साल हथुआ मार्केट का पंडाल अपनी भव्यता और विशेषता
से लोगों को अंचभित कर देता है । मुझे अच्छे से याद है कि एक वर्ष पंडाल के रूप
में करीब 100 फुंट ऊंचा शिवलिंग रूपी पंडाल बना था और उस शिवलिंग पर पानी गिरता
रहता था । इसी तरह एक वर्ष पंडाल के रूप में श्रीकृष्ण का अर्जुन को उपदेश देते
वक्त वाला दृश्य बना था । इस साल फिल्म बाहुबली के भव्य महल का पंडाल तैयार किया
गया है । हर साल नंबर एक पंडाल का पुरस्कार प्रीमियम ब्वॉयज क्लब को ही मिलता है।
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| प्रीमियर ब्वॉयज क्लब - बाहुबली के महल जैसा पंडाल |
विजेता स्पोर्टिंग क्लब, लहुराबीर
हथुआ मार्केट के सामने पुलिस लाइन में भी भव्य पंडाल बनता था और भव्य
मूर्ति लगती थी जो पंडाल के मामले में दूसरे नंबर पर रहता था लेकिन अब यहां पर
पुलिस कार्यालय बन गया है, जिसकी वजब से यहां पर अब दुर्गा प्रतिमा नहीं सजती ।
बाबा मच्छोदरानाथ दुर्गोत्सव समिति
मच्छोदरी पार्क में लगने वाली ये दुर्गा पूजा भी बनारस की सबसे भव्य
दुर्गा पूजाओं में से एक है । यहां की खासियत होती है इसका भव्य पंडाल । देश के
प्राचीन स्मारकों और मंदिरों की प्रतिकृति यहां पंडाल के रूप में दिखते रहे हैं ।
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| बाबा मच्छोदरानाथ समिति में बना पंडाल |
मां बागेश्वरी देवी दुर्गा पूजा क्लब,जैतपुरा
बागेश्वरी देवी मंदिर परिसर में लगने वाली इस दुर्गा पूजा ने अपनी अलग
ही पहचान बनाई है । इस पूजा समिति की खासियत होती है इसकी प्रतिमा जो हर बार लोगों
को चौंकने पर मजबूर कर देती है । दरअसल यहां पर दुर्गा मूर्ति मिट्टी की बजाए किसी
विशेष पदार्थ से बनाई जाती है । कुछ पुराने उदाहरण बता रहा हूं एक साल अमेरिकी
डायमंड की मूर्ति, एक साल तांबे की मूर्ति, एक साल पेंसिल, रबड़ और कटर की मूर्ति,
एक साल आग की मूर्ति (जी हां आग की मूर्ति सिलेंडर गैस पाइप से कनेक्टन थी और
मूर्तियों में आग जलते थे)। इस क्लब की
मूर्तियों ने हमेशा लोगों को आकर्षित किया है ।
इसके अलावा सनातन धर्म इंटर कॉलेज में लगने वाली दुर्गा पूजा की
भव्यता भी देखने लायक होती है । यहां की मूर्ति भी विशेष होती है।
ईगल क्लब, जंगमबाड़ी
बंगाली समाज द्वारा जंगमबाड़ी मठ के सामने ईगल क्लब की दुर्गा मूर्ति
स्थापित की जाती है, यहां की मूर्ति बेहद सुंदर होती हैं । यहां की मूर्ति की एक
खासियत होती है कि यहां मां जगजननी हमेशा क्रोधित रूप में दिखती हैं और उनके सिर
पर मुकुट नहीं होता ।
जगतगंज पर लगने वाली दुर्गा प्रतिमा की पहचान सड़क पर होने वाली
लाइटिंग से है । इतना ही नही यहां पर इलेक्ट्रिक दुर्गा पूजा होती है, 10 मिनट का
शो होता है । जिसमें दुर्गा जी के हाथों से त्रिशूल निकलकर महिषासुर को जाकर लगता
है ।
बनारस शहर में प्रहलादघाट, पांडेयपुर, अर्दलीबाजार में भी आकर्षक और
भव्य पंडाल बनाए जाते हैं और छोटी-छोटी सैकड़ों मूर्तियां गली मोहल्लों में लगती हैं ।
सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर शाम के बाद आधा बनारसर शहर सड़कों पर होता है । कई परिवार तो
रात के 12 बजे घुमने निकलते हैं । वाराणसी के आस-पास पड़ाव और मुगलसराय में भी बेहतरीन दुर्गा मूर्तियां और पंडाल लगते हैं । वाराणसी
में दुर्गा पूजा एक ऐसा त्योहार जो लोगों को आपस जोड़ता तो है ही साथ ही उससे एक मिनी
अर्थव्यवस्था भी फलती फूलती है जिससे हजारों लोगों की रोजी रोटी चलती है ।



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