Thursday, August 30, 2018

बनारस को मिल गया भागीरथ(पार्ट 2)



अब से करीब 200 साल पहले बनारस से होते हुए दुनिया के सबसे लंबे हाईवे का निर्माण कराया था शेरशाह सूरी ने । उसके बाद वाराणसी में सड़कों का निर्माण तो हुआ लेकिन किसी नामी हाईवे को लेकर कोई काम नहीं हुआ । आज से करीब 16 साल पहले अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार ने वाराणसी से होते हुए फिर एक जबरदस्त हाईवे का निर्माण कराया, जिसे नाम दिया गया स्वर्णिम चतुर्भुज(गोल्डन क्वाडिलेट्रल) ये देश के चारो महानगरों को जोड़ती है । इस सड़क के निर्माण के बाद एक बार फिर वक्त ठहर सा गया । किसी हाईवे का निर्माण बनारस या उसके आस-पास के जिलों में नहीं किया गया, जबकि ये माना जाता है कि हाईवे विकास की सड़क होती है । 2014 में नरेंद्र मोदी के वाराणसी का सांसद और देश का प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद देश में हाईवे का जाल बिछाने के महाअभियान की फिर से शुरूआत हुई । इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी जिम्मेदारी सौंपी सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को । पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को इसके आस-पास के जिलों से आवागमन आसान बनाने के लिए हाईवे के जाल बनाने का संकल्प नितिन गडकरी ने लिया । आपको एक-एक कर बताते हैं कि बनारस के आस पास हाइवे का कितना घना जाल बना रहे हैं सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
-      वाराणसी से जौनपुर को जोड़ने वाली सड़क, जो बाबतपुर हवाई अड्डे से होकर गुजरती है, उसे 4 लेन से 8 लेन में बदलने का काम तेजी से चल रहा है

-      वाराणसी में जाम की समस्या को देखते हुए वाराणसी के बाहरी इलाकों से होते हुए रिंग रोड फेज 1(16 किलोमीटर) का काम 90 फीसदी पूरा हो चुका है, जबकि रिंग रोड फेज2 (53 किमी.) लंबा काम शुरू हो चुका है ।
-      वाराणसी से गोरखपुर जाने वाली सड़क(सवा दो सौ किलोमीटर) जोकि 2 लेन की थी उसे भी 4 लेन करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है ।
-      वाराणसी से आजमगढ़ जाने वाली दो लेन सड़क(177 किमी.) को 4 लेन हाइवे में तब्दील करने का काम चल रहा है।
-      बनारस-सुल्तानपुर फोर लेन का काम भी शुरू हो चुका है, ये सड़क लखनऊ जाने के लिए समय को कम कर देगी ।
-      वाराणसी से बिहार के औरंगाबाद को जोड़ने के लिए 6 लेन का हाईवे बनाने का प्रस्ताव पास हो चुका है ।
-      वाराणसी-शक्तिनगर को जोड़ने वाली सड़क(117 किलोमीटर) को 6 लेन के हाईवे में तब्दीन करने का काम भी तेजी से चल रहा है, हालांकि ये सड़क यूपी सरकार बना रही है, हालांकि इसका श्रेय भी मोदी सरकार को जाता है ।
-      इन सबके अलावा स्वर्णिम चुतुर्भुज की सड़क जो इलाहाबाद हंडिया से होते मोहनसराय बाईपास होते हुए चंदौली तक जाती है, उसके हंडिया-चंदौली तक का रास्ता जो पहले 4 लेन का था उसे 6 लेन का काम अंतिम चरण में है
-      कुल मिलाकर वाराणसी को उसके आस-पास के जिलों से मजबूत और चौड़ी सड़क से जोड़ने से न सिर्फ वाराणसी का विकास होगा बल्कि उसके आस-पास के जिले भी विकसित होंगे ।
-      अगली कड़ी में आपको बताऊंगा कि स्वास्थ्य के मामले में कैसे बनारस को उसका भागीरथ मिल गया है

Wednesday, August 22, 2018

...बनारस को उसका भागीरथ मिल गया (पार्ट 1)



जिस तरह से गंगा को शिवजी की जटाओं से धरती पर लाने का काम भागीरथ ने किया था। ठीक उसी तरह बनारस यानी वाराणसी यानी काशी में विकास की गंगा बहाने का काम किया है उसके सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने। बनारस की पहचान भले ही मोदी के वाराणसी के सांसद बनने से कई सौ सालों पहले से हो लेकिन ये भी सच है कि वाराणसी का जितना नाम पिछले 4 सालों में लिया गया है, उतना शायद ही पहले कभी लिया गया हो । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सौभाग्य है कि वाराणसी ने उन्हें अपना सांसद चुना और ये वाराणसी का अहोभाग्य है कि नरेंद्र मोदी ने अपने सांसद और प्रधानमंत्री बनने का आभार विकास की गंगा के रूप में जताया । वाराणसी में जिस पैमाने पर विकास के काम हो रहे हैं उसका एक चौथाई भी अब से पहले तक नहीं हुआ था । वाराणसी में हुए विकास कामों का एक-एक विवरण दूंगा आपको ताकि आपको पता लग सके कि आखिर एक प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र और दुनिया के सबसे पुराने जिंदा शहर का जब मिलन होता है तो आखिर वो कैसा दिखता है । शुरुआत वाराणसी में रेलवे के विकास से ।
-   देश की पहली महामना एक्सप्रेस वाराणसी को मिली, जो दूसरे रेलवे कोच के मुकाबले बेहद आधुनिक और सुविधाजनक है । महामना एक्सप्रेस नई दिल्ली से वाराणसी के लिए शुरू की गई ।


-   वाराणसी में कैंट रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण का काम चल रहा है । प्लेटफॉर्म नंबर 1 को आधुनिक बनाया जा रहा है, इसके साथ ही कैंट रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म का भी विस्तार किया जा रहा है । स्टेशन पर स्वचालित सीढ़ियां भी लगाई गई हैं ।
-   वाराणसी के मंडुआडीह से शिवगंगा एक्सप्रेस पहले से चलती थी लेकिन स्टेशन नाम मात्र का बनाया गया था। मोदी सरकार आने के बाद इस स्टेशन का कायापलट हो गया। अब इसे फाइव स्टार स्टेशन बनाने की दिशा में काम चल रहा है । प्लेटफॉर्म पर सुंदरता के अलावा, नए प्लेटफॉर्म का निर्माण, नई बिल्डिंग का निर्माण आदि काम तेजी से चल रहा है ।

-   वाराणसी में रेलवे का कायापलट करने के लिए वाराणसी से इलाहाबाद को जोड़ने वाली सिंगल लाइन को न सिर्फ डबल लाइन करने का काम तेजी से चल रहा है बल्कि उसके विद्युतीकरण का भी काम भी जारी है । इससे इलाहाबाद से आने-जाने वाली ट्रेनों का समय कम लगेगा ।
-   वाराणसी के आस पास के छोटे छोटे स्टेशनों पर भी विकास के काम चल रहे हैं । इसके अलावा वाराणसी के काशी स्टेशन को भी मॉडल स्टेशन बनाने का काम शुरू हो गया है । काशी स्टेशन गंगा नदी के किनारे हैं, यहां से सड़क मार्ग और जल मार्ग को जोड़ने का प्रोजेक्ट है, जिस पर काम चल रहा है ।
-   वाराणसी की पहचान है मालवीय सेतु यानी राजघाट का पुल चूंकि ये अंग्रेजों के जमाने में बनाया गया था लिहाजा रेलवे ने इस पुल के समानांतर एक पुल बनाने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है । इसके निर्माण में समय लगेगा लेकिन ये भी जल्द मूर्त रूप ले लेगा ।
-   इसके अलावा वाराणसी के पास गाजीपुर जिले में भी रेलवे के विकास के कई काम हुए हैं ।
-   कुल मिलाकर वाराणसी के लिए रेलवे की ओर से बहुत से काम किए जा रहे हैं । इसके पीछे एक वजह पीएम मोदी हैं तो दूसरी ओर वाराणसी के बीएचयू से पढ़े और गाजीपुर के सांसद मनोज सिन्हा जो कि रेल राज्य मंत्री हैं उनकी मेहनत है ।
-   वाराणसी के लोगों के लिए इससे बेहतर क्या हो सकता है कि रेलवे के लिए जोरदार काम पीएम मोदी ने किया है, जिसका सीधा फायदा बनारस की आम जनता को होगा ।
-   अब अगली कड़ी में आपको बताऊंगा कि वाराणसी में सड़कों लिए सांसद नरेंद्र मोदी ने क्या-क्या किया है
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Friday, August 10, 2018

चुनाव आने वाले हैं राहुल मंदिर जाने वाले हैं

                                          सोमनाथ मंदिर में राहुल गांधी          फाइल फोटो


मंदिर में हाथ जोड़े खड़े हैं, सफेद पायजामा कुर्ता पहने(राजनीतिक चोला है) । पंडित जी प्रसाद देते हैं, कुछ देर आंख बंद और फिर चल दिए। अपने असली काम चुनावी रैली के लिए । बीते दो चुनाव(गुजरात और कर्नाटक) के दौरान राहुल गांधी की रणनीति यही रही है, टेंपल रन की । अब देश में चुनाव के दौर एक बार फिर से शुरू होने जा रहा है और इस बार दौर लंबा चलेगा । मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के बाद सिर पर लोकसभा चुनाव आ जाएगा । ऐसे में वोटरों को लुभाना राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है । कर्नाटक और गुजरात चुनाव के दौरान राहुल ने मंदिरों के इतने चक्कर काटे कि खुद कांग्रेस के लोग अचंभित होंगे ।  गुजरात चुनाव के दौरान तो राहुल गांधी ने राज्य के 20 से ज्यादा मंदिरों के दर्शन कर लिए । यहां तक कि राहुल ने खुद को शिवभक्त, जनेऊधारी ब्राह्ण भी कहा था । कर्नाटक चुनाव के दौरान भी राहुल गांधी ने मंदिरों के चक्कर लगाए थे । कर्नाटक चुनाव के दौरान राहुल ने ऐलान किया था कि वो मानसरोवर की यात्रा पर जाएंगे । सावन का महीना आ गया लोग मानसरोवर की यात्रा से होकर आ गए लेकिन राहुल कैलाश तो छोड़िए दिल्ली में भोलेनाथ के मंदिर तक नहीं गए । ऐसे में जनेऊधारी ब्राह्ण और शिवभक्त राहुल के लिए दिल्ली का एक मंदिर भी करोड़ों किलोमीटर दूर लग रहा होगा ।
अब देश में चुनावी सीजन की शुरुआत होने जा रही है सो राहुल की शिवभक्ति, भगवत भक्ति फिर जागने वाली है । मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकाल से लेकर राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन कर आएंगे वो । एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के हर बड़े मंदिर में राहुल गांधी के दर्शन की तस्वीर अगले कुछ महीनों में टीवी पर दिखाई देंगी । फिर राहुल गांधी की राजनीतिक आस्था धार्मिक आस्था में बदल जाएगी । सवाल ये है कि क्या राहुल गांधी के लिए आस्था सिर्फ वोटों का सवाल है या फिर वाकई उनके मन में श्रद्धा है ?