Tuesday, October 9, 2018

मां गंगा के लिए आधुनिक भगीरथ हैं वो...



"न किसी ने मुझे भेजा है और ना मैं यहां आया हूं मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है"


2014 लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी से पर्चा भरने से ठीक पहले नरेंद्र मोदी ने यही वाक्य कहा था । गंगा मईया की कृपा से वाराणसी से नरेंद्र मोदी को प्रचंड जीत मिली और पूरे देश में बीजेपी को प्रचंड बहुमत । बंपर जीत के बाद पीएम मोदी पर जिम्मेदारी थी कि वो गंगा मईया के उपकारों को कैसे चुकाएं । पीएम मोदी ने मां गंगा की सेवा करने का बीड़ा उठाया है । बीते साढ़े 4 साल में बनारस में गंगा के लिए वाराणसी के सांसद और प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ किया उतना तो इतने कम अंतराल में कभी नहीं हुआ ।
  वाराणसी में जीत के बाद पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहला काम मां गंगा को नमन करने का ही किया । उन्होंने मां गंगा की आरती की । इसके बाद दो ऐसे मौके आए जब पीएम मोदी अपने दो दोस्तों को गंगा किनारे लेकर आए । सबसे पहले दिसंबर 2015 में जापान के पीएम शिंजो आबे को वाराणसी ले आए और उन्हें गंगा की आरती दिखाई । इसके बाद इसी साल मार्च में प्रधानमंत्री मोदी अपने दोस्त फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को वाराणसी के घाटों की सैर करवाई और वो भी नाव पर बिठाकर ।



  जहां तक मेरी याददाश्त है मेरे सामने इससे पहले कभी किसी बड़े देश का राष्ट्राध्यक्ष वाराणसी नहीं आया था । बहरहाल ये बात घुमने घूमाने की हुई है लेकिन सवाल है कि गंगा के लिए उन्होंने अब तक क्या किया तो चलिए आपको गिनाते हैं पीएम मोदी के द्वारा शुरू कराए गम काम ।
  1.  वाराणसी के 84 घाटों पर हाई मास्ट बल्ब जलते थे जिनसे पीली छटाएं निकलती थीं जिससे रात में भी घाटों की सुंदरता निखरती थी । पीएम मोदी ने बिजली बचाने के लिए घाटों के बल्ब को एलईडी से बदलवाए । ये एलईडी सफेद रंग की रोशनी देते थे । वाराणसी शहर के लोगों ने इसकी शिकायत पीएमओ तक की, जिसके तुरंत बाद सफेद एलईडी लाइटों को पीली एलईडी लाइटों से बदलने में देर नहीं किया गया ।
  2. गंगा नदी में सीवर का पानी गिरता है इसमें कोई शक नहीं है बनारस में पहले से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट है लेकिन बनारस शहर से निकलने वाली गंदगी के हिसाब से उसकी क्षमता नहीं है । इसीलिए पीएम मोदी ने बनारस शहर के लिए तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को मंजूरी दी । सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से शहर के नालों का पानी साफ होगा और फिर उस साफ पानी को या तो गंगा में बहाया जाएगा या फिर उसे किसानों की खेतों तक पहुंचाया जाएगा।

-         3 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बन रहे हैं

  •   दीनापुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट – ये बनारस का सबसे बड़ा सीवर के पानी को साफ करने का प्लांट होगा । इसका काम 80 फीसदी तक पूरा हो चुका है ।
  • इसके बाद गोइठहा में भी सीवेज ट्रीटमेंट का काम पूरी रफ्तार से चल रहा है । दिसंबर तक इसका काम काम पूरा हो जाएगा।
  • इसके अलावा रमना में भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम तेजी से चल रहा है ।

-               ये तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ऐसी जगहों पर बनाए जा रहे हैं जिससे पूरा शहर इसके जरिए कवर हो जाए । 
  
-                     इन तीनों ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के बन जाने से शहर के गंदे नालों का पानी सीधे ट्रीटमेंट प्लांट में गिरेगा और पानी साफ होगा।
  • पीएम मोदी ने गंगा की सफाई करने के लिए डेढ़ करोड़ की लागत से एक अमेरिकन मशीन, जिसे ट्रैस स्कीमर कहते हैं, काशी को दी है । ये मशीन गंगा की ऊपरी सतह से गंदगी की सफाई करती है ।
    गंगा में सफाई करती ट्रैस स्कीमर मशीन
  •  गंगा को साफ करने का अलावा पीएम मोदी की इच्छा है कि नदी मार्ग का विकास हो जिससे यातायात का एक नया साधन बने साथ ही औद्योगिक सामान भी गंगा के जरिए पहुंचे । इसी के तहत पश्चिम बंगाल के हल्दिया से लेकर वाराणसी तक एक जलमार्ग का निर्माण हो रहा है । रामनगर के पास इसके लिए बकायदा एक बंदरगाह तैयार हो रहा है । जहां हल्दिया से आया माल उतरेगा और सड़क मार्ग से आगे जाएगा ।
  • अगले छह महीने के भीतर गंगा नदी के जरिए इलाहाबाद तक जाने का साधन भी उपलब्ध होगा सड़क परिवहन और जल संसाधन मंत्रालय की ओर से ।
  •  इन सबके अलावा अस्सी घाट की स्वच्छता और उसे नया रूप देना भी पीएम मोदी की ही देन है । पहले अस्सी पर चाय की दुकान पर अड़ी लगती थी लेकिन अब लोग अस्सी घाट पर शाम को वक्त बीताना पसंद करते हैं ।
    अस्सी घाट से गंगा का नजारा
  • मोदी सिर्फ गंगा नदी के प्रति ही गंभीर नहीं हैं बल्कि उन्हें शहर के प्रसिद्ध तालाब और कुंडों की भी उतनी ही परवाह है तभी जो दुर्गाकुंड का बदला स्वरूप उन्हीं की देन है । जहां शाम होते ही अब बैठने का मन करता है । इसके अलावा शहर के दूसरे प्राचीन तालाबों को भी हृदय योजना की तरह सजाया-संवारा गया है ।

  • रात के समय दुर्गाकुंड तालाब का एक दृश्य

 पीएम मोदी के साथ-साथ केंद्रीय सड़क परिवहन और जल संसाधन मंत्री भी उनके साथ इस  काम में जी जान से जुटे हुए हैं । काशी में गंगा के पुर्नउद्धार के लिए जितने भी काम चल रहे हैं वो सभी 2014 के बाद से शुरू हुए हैं । ऐसे में ये कहना बिल्कुल ही जायज  होगा कि नर्मदा नदी के राज्य का एक इंसान वाकई गंगा के लिए आधुनिक भागीरथ साबित हो रहा है । 

 हर हर गंगे


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