काशी का नाम मुहम्मदाबाद रखने की भी साजिश हुई थी
द्वादश
ज्योतिर्लिंगों में से है एक काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की महिमा अपरंपार है ।
काशी के कण कण में शंकर विराजते हैं । काशी तो स्वयं भोलेनाथ के त्रिशूल पर बसी
है। ऐसी मान्यता है कि प्रलय आ जाए तो भी काशी नष्ट नहीं होगी । दुनिया के जीवित
सबसे पुराने शहर...काशी की पवित्रता पर कई बार चोट भी पहुंचाने की कोशिश की गई और
इसमें मुस्लिम शासकों का हाथ था ।
काशी विश्वनाथ मंदिर
पर औरंगजेब ने सन 1669 में आक्रमण कर उसे काफी नुकसान पहुंचाया था । औरंगजेब ने
मंदिर को ध्वस्त करवा दिया और मंदिर की सिर्फ एक दीवार छोड़ दी और उसी जगह मस्जिद
खड़ी करवा दी । उस दौरान
मंदिर के पुरोहितों ने शिवलिंग को बचाने के लिए उसे ज्ञानवापी कुएं में छिपा दिया
था । मस्जिद से सटी मंदिर की एक दीवार अब भी
मौजूद है, जो काशी विश्वनाथ मंदिर की सत्यता को उजागर करता है, हालांकि सुरक्षा
घेरा होने के कारण वहां अब लोगों को जाने नहीं दिया जाता । विश्वनाथ मंदिर में लगी
नंदी बैल की मूर्ति का मुख अभी भी उसी दिशा में है, जहां अब ज्ञानवापी मस्जिद है ।
हिंदू धर्म में मान्यता है कि शिवलिंग की दिशा में ही नंदी का मुख है । ऐसे में ये
दो मुख्य सबूत बताने के लिए काफी हैं कि प्राचीन विश्वनाथ मंदिर उसी जगह पर मौजूद
था, जहां आज मस्जिद है ।
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| नंदी के पीछे दिख रहा वर्तमान विश्वनाथ मंदिर |
ऐसा कहा जाता है कि
मुस्लिम आक्रांता औरंगजेब ने काशी का नाम बदल दिया था । उसने इस पवित्र शहर का नाम
मुहम्दाबाद रख दिया था, लेकिन काशी की पवित्रता के आगे वो नाम चलन में नहीं आ सका
।
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| मौजूदा विश्वनाथ मंदिर |
तस्वीरों
में आप जो विश्वनाथ मंदिर अभी देखते हैं उसका निर्माण प्राचीन विश्वनाथ मंदिर से
कुछ दूरी पर किया गया है । साल 1777 में इंदौर की राजकुमारी अहिल्याबाई होलकर ने
मौजूद मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर के शिखर पर सोने की चादरें बिछाई गई हैं
जिसे पंजाब के राजा रणजीत सिंह ने दान में दिया था । महाराजा रणजीत सिंह ने 22 टन
सोने से मंदिर के शिखरों को स्वर्ण मंडित कराया था ।
ऐसा
नहीं है कि विश्वनाथ मंदिर पर आक्रमण करने वाला औरगंजेब पहला आक्रांता था । इससे
पहले भी कई बार विश्वनाथ मंदिर पर आक्रामण किए गए । इतिहासकारों के मुताबिक सन्
1194 में मुहम्मद गोरी ने विश्वनाथ मंदिर को लूटने के बाद तुड़वा दिया था । इसे
फिर से बनाया गया, लेकिन एक बार फिर इसे सन् 1447 में जौनपुर के सुल्तान महमूद शाह
द्वारा तोड़ दिया गया। सन् 1585 में राजा टोडरमल की सहायता से पंडित नारायण भट्ट
ने इस स्थान पर फिर से एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। जिसके बाद औरंजगेब ने
1669 में आदेश देकर विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया था और उसके
सैनिकों ने प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर को गिराकर उस जगह मस्जिद बना दी ।
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| ज्ञानवापी मस्जिद और उसकी एक दीवार |
मौजूदा काशी विश्वनाथ
मंदिर के पास आज जो मस्जिद है उसे ज्ञानवापी मस्जिद कहा जाता है, जबकि स्कंद पुराण के काशी खंड में ज्ञानवापी
को तीर्थ कहा गया है । ज्ञानवापी शब्द ज्ञान+वापी से मिलकर बना है जिसका मतलब होता
है ज्ञान का तालाब या ज्ञान का कुंड ।
वैसे
काशी और उसके नाथ यानी विश्वनाथ की महिमा अनंत और अपरंपार है । मंदिर और मस्जिद के
विवाद से अलग एक बात जो शाश्वत सत्य है कि काशी सदियों से लोगों की आस्था और
अध्यात्म का केंद्र रही है और आगे भी रहेगी...क्योंकि शिव में काशी है..काशी में
शिव है ।
(लेख में सभी तथ्यों
का चयन बेहद गंभीरता पूर्वक किया गया है)



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